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भारत और संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोध

भारत सुदृढ़ता से सभी प्रयासों का समर्थन करता है। विशेष तौर पर संयुक्त राष्ट्र की परिधि में आने वाले, जोकि आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करते हैं। आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई में सफलता, आतंकवाद विरोधी सहयोग सुदृढ़ीकरण में उन्नति के साथ-साथ और अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तरों पर सूचना का आदान-प्रदान में निहित है। वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों द्वारा सहमत वैश्विक आतंकवादरोधी कार्यनीति एक अद्वितीय और सार्वभौमिक आतंकवादरोधी सहमत कूटनीतिक ढांचा है।

 

भारत संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंगीकृत आतंकवाद संबंधी 13 क्षेत्रीय अभिसमयों में भागीदार है। आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई के लिए एक व्यापक विधिक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (सीसीआईटी) मसौदे को 1996 में तैयार करने की पहल की। वृहद रूप से भारत के चुस्त पहल के परिणामस्वरूप वर्ष 2007 में सी.सी.आई.टी. के पाठ का एक मसौदा तैयार हुआ जो कि अधिकांश राष्ट्रों को मान्य था। परन्तु कुछ राष्ट्रों को अब भी कुछ मुद्दों पर समस्या थी जिन पर बातचीत द्वारा हल निकालने की प्रक्रिया चल रही है। भारत अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (सीसीआईटी) पर चर्चा करने हेतु महा सभा द्वारा गठित आतंकवाद संबंधी तदर्थ समिति द्वारा किए गए कार्य को महत्व देता है। भारत शीघ्र सी.सी.आई.टी. सम्पन्न करने का उत्सुक है। सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने 2011-12 में आतंकवादरोधी समिति पर सुरक्षा परिषद समिति (सीटीसी),  आतंकवादी कृत्यों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा से संबंधित कार्य समूह और सोमालिया-इरिट्रिया शास्ति समिति की अध्यक्षता की।

 

 

भारत यूएन सुरक्षा परिषद संकल्पों द्वारा स्थापित आतंकवाद रोधीतंत्र का समर्थन करता है जिसमें  संकल्प 1267 और इसके बाद संकल्प 1988 और संकल्प 1989 शामिल हैं जो कि अलकायदा/तालिबान के विरूद्ध शास्ति, 1373 से संबंधित हैं (जिसके तहत अन्य बातों के सात-साथ आतंकवादरोधी समिति का गठन हुआ), 1540 (जो कि इस परिपेक्ष में जनसंहार के हथियार के अप्रसार से संबंधित है) और इसके बाद के संकल्प जिससे इन तीनों मूल संकल्पों का नवीकरण, सुदृढ़ीकरण या संशोधन किया गया।

 

 

आतंकवादरोधी कार्यान्वयन कार्य बल (सीटीआईटीएफ) के गठन से यूएन प्रणाली में समेकित आतंकवादरोधी दृष्टिकोण के संतुलन के साथ-साथ कार्यनीति के कार्यान्वयन के समर्थन के लिए एक संस्थागत ढांचा उपलब्ध हुआ है। संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवादरोधी कार्यनीति के प्रभावशाली और संतुलित कार्यान्वयन के लिए वृहद अन्तर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग अपेक्षित है। इस परिपेक्ष में भारत सीटीआईटीएफ कार्यालय के भीतर स्थापित संयुक्त राष्ट्र आतंकवादरोधी केन्द्र पर इन प्रयासों पर सहयोग देने के लिए भरोसा करता है।

 

 

भारत दृढ़ता से संयुक्त राष्ट्र में नियामक ढांचे के सुदृढ़ीकरण के पक्ष में है ताकि आतंकवाद की महाविपत्ति से प्रभावशाली तरीके से निपटा जा सके। भारत कानूनी साधनों की गुंजाइश का दायरा बढ़ाने और आतंकवादियों के सुरक्षित स्थलों को नष्ट करने उनके वित्तीय प्रवाह और समर्थित नेटवर्क पर अंकुश लगाने तथा आतंकवादियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई करने संबंधी प्रवर्तन प्रयासों की आवश्यकता पर बल देता है। भारत, संयुक्त राष्ट्र ढांचे में आतंकवाद विरोध हेतु समन्वयक की तैनाती का समर्थन करता है ताकि आतंकवाद रोधी मामले में शामिल संयुक्त राष्ट्र के निकायों के कार्यों को संभाला जा सके जैसा कि जून 2014 में आयोजित जीसीटीएस की चौथी समीक्षा बैठक में हाल ही में सहमति व्यक्त की गई थी। भारत सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगांठ सम्मेलन के दौरान सीसीआईटी पर हस्ताक्षर किए जाने के लिए उत्सुक है।

 

 


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