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भारत और संयुक्त राष्ट्र

शांति स्थापन और शांति संवर्धन

अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र की सहायता हेतु भारत की प्रतिबद्धता अडिग रही है और 1950 के दशक में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से ही शांति रक्षा कार्य में भारत का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। भारत ने लगभग 1,80,000 सैन्य दलों का सहयोग दिया है, जो किसी भी देश से अधिक की संख्या है जिसने 44 से भी अधिक मिशनों में भागीदारी की है और 156 भारतीय शांति रक्षक सैनिकों ने यूएन मिशनों में कार्य करते हुए उच्चतम बलिदान किया है। भारत ने यू.एन. मिशनों के लिए प्रख्यात सैन्य बल कमांडरों को भी भेजा है और लगातार भेजता रहा है।

 

2014 में भारत 12 यूएन शांति रक्षण मिशनों 8,123 में तैनात कार्मिकों सहित दूसरा सबसे बड़ा सैन्यदल भेजने वाला देश जिनमें से 991 पुलिस कार्मिक है, जिनमें यू.एन. के अंतर्गत प्रथम महिला पुलिसयुनिट शामिल है। के निर्वाह द्वारा और यू.एन. मिशनों पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तैनात भारतीय सैन्य बलों तथा पुलिस कर्मियों द्वारा अनवरत रूप से संतुलित कार्यनिष्पादन के उच्च ने विश्व स्तर मानकों से विश्व भार में प्रतिष्ठा बढ़ी है।

 

भारत का यह मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को समकालीन शांति रक्षण अभियानों के स्वरूप व भूमिका में तेजी से हो रहे बदलाव को समझना होगा। (यूएन शांतिरक्षण अभियानों के लिए) सुरक्षा परिषद, के अधिदेश को मूलभूत वास्तविकताओं से जोड़ने और शांति रक्षण अभियान के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों से संबद्ध करने की आवश्यकता है। यह संकटपूर्ण है कि सैन्यदल और पुलिस प्रदाता देशों को सभी स्तरों पर और मिशन आयोजना के सभी मायनों में पूर्णतः शामिल होना चाहिए। संघर्ष के बाद के समाजों जहां यूएनपीकेओ को अधिदेशित किया गया था, में शांति स्थापना हेतु बृहद वित्तीय और मानव संसाधन होने चाहिए।

 

दिसंबर 2010 में शांति स्थापना आयोग की संगठनात्मक समिति में तृतीय 2 वर्ष की अवधि हेतु भारत को पुनः नियुक्त किया गया था। भारत शांति सम्मेलन के लिए राष्ट्रीय समर्थित योजनाओं, जबकि एक रचनात्मक दृष्टिकोण के लिए परिचर्चा करते हुए और पीबीसी द्वारा एक हल्के स्पर्श में सलाह प्रदान करने में समर्थन देने में और इनमें शामिल होने में एक मजबूत पक्षधर है।

 

यूएन शांति रक्षण मिशनों में भारत का योगदान

सामान्य सूचना

 

1.1948 से यूएन शांतिरक्षण बलों ने 68 फील्ड मिशन सम्पन्न किए हैं। अब तक लगभग 97,729 कार्मिक चार महाद्वीपों में यूएनडीपीकेओ की अगुवाई में 16 शांति अभियानों में कार्य कर रहे हैं। 1999 से इसमें नो गुना बढ़ोत्तरी हुई है। कुल 120 देशों ने यूएन शांतिरक्षण स्थापन में सैन्य और पुलिस कार्मिकों का सहयोग दिया है। वर्तमान में इनमें से सेवारत 83,936 से अधिक सैन्य बल और सैन्य आवजर्वर है और लगभग 11,929 पुलिस कार्मिक हैं।

 

भारतीय योगदान

 

2. भारत शुरूआत से यूएन मिशनों का सबसे बड़ा सैन्य दल सहयोगी है। जहां तक भारत की बात है, भारत ने 180000 से अधिक सैन्य बलों और पुलिस कार्मिकों की एक महत्वपूर्ण संख्या के सहयोग से 44 शांति रक्षण मिशनों में भाग लिया है।

3.  भारत ने विभिन्न यूएन मिशनों में अब तक, एक सैन्य सलाहकार (ले. जनरल आर के मेहता) एक पुलिस सलाहकार (सुश्री किरण बेदी) एक उप सैन्य सलाहकार (ले. ज. अभिजीत गुहा) 14 सैन्य कमांडर और असंख्य पुलिस आयुक्तों को उपलब्ध कराया है। भारतीय सेना ने सैन्य आवजर्वरों के रूप में महिला अधिकारियों और स्टाफ अधिकारियों को उनके अलावा, यूएन मिशनों में चिकित्सा यूनिटों के भाग के रूप में नियुक्त किया गया था। प्रथम महिला दस्ता, भारत से बनी एक पुलिस युनिट को 2007 में लाईबेरिया में यूएन अभियान (यूएनएमआईएल) में नियुक्त किया गया।

4. बहुत से वीर भारतीय सैनिकों ने विश्व में शांति और सौहार्द के लिए अपना जीवन अर्पण कर दिया। नीले ध्वज के अंतर्गत सेवा करते हुए, 156 भारतीय सैनियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया।

5. पिछले मिशनः निम्नलिखित मिशनों में भारत ने 1950 से सहयोग दिया है।

 

  • कोरिया (1950-54): कोरिया में घायलों तथा बीमारों की देखभाल करने की सुविधा के लिए 17 अधिकारियों, 9 जेसीओ तथा  300 अन्य रैकों को शामिल करके  परा चिकित्सा इकाई स्थापित की गई थी। ले. जेनरल के. एस. थिमैया को यूएन द्वारा स्थापित न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रीएशन कमीशन (यूएनआरसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। भारत ने भी मेजर जनरल एसपीपी थोराट के अधीन 231 अधिकारियों, 203 जेसीओ तथा 5696 अन्य रैंकों को शामिल करके कस्टोटियन फोर्स प्रदान किया था।
  • भारत-चीन (1954-70): भारत ने वियतनाम, कंबोडिया तथा लाओस के तीन देशों के भारत-चीन के नियंत्रण के लिए पैदल सेना बटालियन तथा सहयोगी स्टॉफ प्रदान किया था। उनके कार्यों में अन्य बातों के साथ-साथ, मॉनीटरिंग, युद्ध-विराम तथा युद्ध बंदियों का प्रत्यावर्तन शामिल था। 1954-1970 की अवधि के दौरान कुल 970 अधिकारियों, 140 जेसीओ तथा 6157 अन्य रैंकों को प्रदान किया गया था।
  • मध्य पूर्व (1956-67): संयुक्त राष्ट्र आपात बल (यूएनईएफ), जहां पहली बार सशस्त्र बल दस्ता नियुक्त किया गया। भारत का योगदान, पैदल सेना तथा अन्य समर्थन अवयवों का था। 11 वर्ष की अवधि में, 393 अधिकारियों, 409 जेसीओ तथा 12383 अन्य रैंकों ने इन कार्रवाइयों में भाग लिया था।
  • कांगों (1960-64) (ओएनयूसी): 467 अधिकारियों, 401 जेसीओ तथा 11354 को शामिल करके पैदल सेना ब्रिगेड ने भाग लिया तथा कार्रवाई संचालित की थी। ऑपरेशन 39 में भारतीय वायु सेना के छः कैनबेरा एयर क्राफ्ट फ्लाईट ने भी भाग लिया था।
  • भारत दस्ते के कार्मिकों ने अपनी कुर्बानी दी थी। कैप्टन जी एस सालारिया को कटांगा, दक्षिण कोगों में उनके कार्य के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया था।
  • कंबोडिया (1992-93) (यूएनटीएसी): इसे युद्ध विराम पर नजर रखने, लड़ाकूओं को हथियारविहीन करने, शरणार्थियों को प्रत्यावर्तित करने तथा स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए गठित किया गया था। भारतीय सेना के सभी रैंकों में से कुल 1373 लोगों ने भाग लिया था।
  • मोजांबिक (1992-94) (ओएनयूएमओजेड): दो इंजीनियर कंपनियों एचक्यू कंपनी, संभार तत्र कंपनी, स्टॉफ अधिकारियों तथा मिलिटरी पर्यवर्क्षक प्रदान किया गया था। सभी रैंकों मे से कुल 1083 लोगों ने भाग लिया था।
  • सोमालिया (1993-94) (यूनीटाफ एण्ड यूनोसोम-II): भारतीय जल सेना तथा थल सेना से यूएन कार्रवाइयों मे सक्रिय रूप से भाग लिया था। भारतीय थल सेना ने सभी रैंकों के 5000 लोगों के दल का एक ब्रिगेड नियुक्त किया था तथा जल सेना ने चार बटालियन नियुक्त किया था।
  • रवांडा (1994-96) (यूनामिर): एक पैदल सेना बटालियन दल, एक सिग्नल कंपनी, तथा इंजीनियर कंपनी, स्टाफ अधिकारी तथा मिलिटरी पर्यवेक्षक प्रदान किया गया था। सभी रैंकों से कुल 956 लोगों ने भाग लिया था।
  • अंगोला (1989-1999) (यूनावेम): एक डिप्टी कोर्स कमांडर प्रदान करने के अलावा एक पैदल सेना बटालियन दल तथा एक इंजीनियरं कंपनी में से सभी रैंकों के कुल 10 किलो लोग प्रदान किए गए थे। भारत ने यूनावेम-I के लिए 20 मिलोब्स 37 एसओ तथा 30 वरिष्ठ एनसीओ का योगदान दिया था।
  • सिएरा लियोन (1999-2001) (यूनामसिल): सेक्टर एचक्यू तथा फोर्स मुख्यालय स्टाफ के अलावा दो पैदल सेना बटालियन दल, दो इंजीनियर कपनी, शीघ्र प्रतिक्रिया कंपनी, अटैक हेलीकॉप्टर ईकाई, चिकित्सा ईकाई तथा संभार तत्र सहयोग प्रदान किया गया था।
  • इथोपिया-एरीट्रीया (2006-08) (यूएनएमईई): भारत की ओर से योगदान में विभिन्न मुख्यालयों से स्टाफिंग तथा मिलोब के अलावा एक पैदल सेना बटालियन दल, एक निर्माण इंजीनियर कंपनी तथा एक बल रिजर्व कंपनी शामिल थी।

6. मौजूदा मिशन- भारतीय योगदान: भारतीय थल सेना फिलहाल निम्नलिखित संयुक्त राष्ट्र  मिशनों में कार्य कर रही है (कुल 15 मिशनों में से अभी जारी)

 

  • लेबनान (यूनीफिल) (दिसंबर 1998 से): अब तक सभी रैंकों के 650 तथा 23 स्टाफ अधिकारी सहित एक पैदल सेना बटालियन दल तथा लेवल-II अस्पताल। सीरिया संकट के कारण मिशन की मौजूदा परिस्थिति तनावयुक्त है।
  • कांगो (एमओएनयूसी/एमओएनयूएससीओ) (जनवरी 2005 से): विस्तारित अध्याय-VII अधिवेशन। संवर्धित पैदल सेना ब्रिगेड दल (चार पैदल सेना बटालियन) लेवल-III अस्पताल के साथ। थल सेना उड़ान दस्ता, यूटीलिटी हेलीकॉप्टर के साथ। मिलोब तथा एसओ की बड़ी संख्या ने भी योगदान दिया है। इसके अलावा दो गठित पुलिस इकाई (एफपीयू) पूर्व बीएसएफ तथा आईटीबीपी भी 2009 से तैनात है। भारत के लेफ्टीनेंट जनरल चंदर प्रकाश हाल तक मोनुस्कों में फोर्स कमाण्डर थे। मोनुस्को के नए आदेश पत्र को संकल्प 2098 (2013) के माध्यम से यूएन कमाण्ड के तहत मुख्यालय द्वारा प्रदान किए गए ब्रिगेड की मध्यस्थता से लागू कर दिया गया है। मोनुस्को की सहायता से एफएआरडीसी, एम-23 विद्रोह दल को समाप्त करने में सक्षम हो पाया, जबकि अन्य सशस्त्र दलों की मौजूदगी के कारण स्थिति अब भी अस्थिर तथा अनिश्चित बनी हुई है।
  • सूडान (यूएनएमआईएस/यूएनएमआईएसएस) (अप्रैल 2005 से): दो पैदल सैन्य बटालियन दल, सेक्टर मुख्यालय, इंजीनियर कंपनी, सिग्नल कंपनी, लेबल-II अस्पताल तथा मिलोब्स की बड़ी संख्या एवं एसओ/हमारे पास एक डिप्टी फोर्स कमाण्डर (ब्रिगोडिया असित मिस्त्री) तथा हाल ही में डिप्टी पुलिस कमिश्नर (श्री संजय कुंडु) वहां थे। हाल ही में मिशन के नवीनतम राजनीतिक विकास से वृहत् अंतर-जनजाति हिंसा हुई तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विस्थापित हुए। आगामी इंट्रास्टेट विवाद में नागरिकों की सुरक्षा बहाल करते हुए दो भारतीय शांति स्थापकों को अपनी जान गवानी पड़ी। वहां की मौजूदा स्थिति अब भी अत्यधिक अस्थिर बनी हुई है तथा जनजातियों के बीच झड़प की छिट-पुट वारदात की नियमित तौर पर रिपोर्ट की जाती है।
  • गोलन हाइट्स (यूएनडीओएफ) (फरवरी 2006 से): 190 कार्मिकों सहित एक संभार तंत्र बटालियन को यूएनडीओएफ की संभार तंत्र सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए तैनात किया गया है। जुलाई 2012 से मेजर जनरल आईएस सिंघा इस बल के कमाण्डर हैं। सीरियाई संघर्ष के कारण मौजूदा संकट से मिशन प्रभावित हुआ है तथा सीरियाई बलों एवं सशस्त्र दलों के बीच गोलाबारी से शांति स्थापकों का जीवन संकट से पड़ गया है।
  • आइवरी कोस्ट (यूएनओसीआई) (अप्रैल 2004 से): अपने आरंभ से ही यह मिशन भारतीय एसओ तथा मिलोब द्वारा सहायता प्राप्त है।
  • हैती (एमआईएनयूएसटीएएच) (दिसंबर 1997 से): तीन भारतीय एफपीयू के अलावा अर्थात् सीआईएसएफ, सीआरएफ तथा असम राइफल्स, जिनहें अत्यधिक सफलता प्राप्त है, यह मिशन इसके प्रारंभ होने से ही भारतीय थल सेना के स्टाफ अधिकारियों द्वारा सहायता प्राप्त है।
  • लाइबेरिया (यूएनएमआई) (अप्रैल 2007 से): भारत, लाइबेरिया में पूर्व सीआरपीएफ/आरएएफ महिला एवं पुरूष दोनों एफपीयू इसमें योगदान दे रहे हैं। विशेष तौर पर महिला एफपीयू मेजबान देश की महिलाओं की प्ररेणास्त्रोत बन गई हैं तथा विश्व भर में ऐसी अन्य महिलाओं के लिए एक विचाराधारा की प्रतिपादक हैं।  हाल ही के समय तक, भारत के गौतम सवांग वहां पर पुलिस कमिश्नर थे।

सेवा में,

7. यूएन मिशनों में भारतीय थल सेनाः अब तक यूएन मिशनों में हमारे वीर सैनिकों द्वारा निम्नलिखित वीरता पुरस्कार जीता हैः

361742-शांति स्थापक-एमओएनयूसी-19.03.2009-16

 

  • परम वीर चक्र - 01
  • महावीर चक्र - 06
  • कीर्ति चक्र - 02
  • वीर चक्र - 20
  • शौर्य चक्र - 09
  • युद्ध सेवा मेडल - 04
  • सेना मेडल - 32

कैप्टन गुरवचन सिंह सलारिया, पीवीसी

 


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